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बाहुबली: द एपिक 31 अक्टूबर को होगी रिलीज़, दोनों भाग एक साथ बड़े पर्दे पर

भारतीय सिनेमा की ऐतिहासिक फिल्म सीरीज़ ‘बाहुबली’ एक बार फिर बड़े पर्दे पर लौटने जा रही है, लेकिन इस बार नए अंदाज़ में। निर्देशक एस.एस. राजामौली ने घोषणा की है कि ‘बाहुबली: द बिगिनिंग’ (2015) और ‘बाहुबली 2: द कॉन्क्लूज़न’ (2017) को मिलाकर तैयार किया गया नया संस्करण ‘बाहुबली: द एपिक’ इस साल 31 अक्टूबर को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज़ किया जाएगा। इस फिल्म को दो भागों को एकीकृत कर री-एडिट किया गया है ताकि दर्शकों को पूरी कहानी एक साथ देखने का अनुभव मिल सके। प्रभास, राणा दग्गुबाती, अनुष्का शेट्टी, तमन्ना भाटिया, राम्या कृष्णन और सत्यराज जैसे सभी प्रमुख कलाकार इस संस्करण में नजर आएंगे। ‘बाहुबली: द एपिक’ भारत के साथ-साथ अमेरिका, फ्रांस, जापान जैसे देशों में भी रिलीज़ होगी और इसे हिंदी, तेलुगु, तमिल और मलयालम में प्रदर्शित किया जाएगा। राजामौली ने इसे बाहुबली की 10वीं वर्षगांठ पर दर्शकों के लिए एक विशेष भेंट बताया है। दर्शक अब एक बार फिर महिष्मती की महागाथा को एक नई रूपरेखा में देख सकेंगे।

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75 की उम्र के बाद नेताओं को सेवा से निवृत्त हो जाना चाहिए: मोहन भागवत का बड़ा बयान

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान राजनीतिक नेतृत्व को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति 75 वर्ष की उम्र पार कर लेता है, तो उसे स्वेच्छा से जिम्मेदारियों से पीछे हट जाना चाहिए और नए नेतृत्व के लिए रास्ता बनाना चाहिए। भागवत ने कहा, “हमारे पूर्ववर्ती कहते थे कि 75 की उम्र के बाद शॉल-सन्मान मिलना चाहिए यानी अब सक्रिय भूमिका से पीछे हट जाना चाहिए।”उन्होंने इस विचार को आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक मोरोपंत पिंगले से प्रेरित बताया। विपक्ष का निशाना भागवत के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई। विपक्षी दलों ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी के रूप में देखा, जो सितंबर 2025 में 75 वर्ष के होने जा रहे हैं।• कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा,“मोहन भागवत जी 11 सितंबर को खुद 75 वर्ष के हो जाएंगे। ये वक्तव्य सिर्फ एक नहीं, दो लोगों पर लागू होता है।”• शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा,“2014 के बाद 75 पार कर चुके कई वरिष्ठ नेताओं को मार्गदर्शक मंडल में डाल दिया गया था। अब देखना है कि यही नियम सभी पर लागू होगा या नहीं।” भाजपा की स्थिति हालांकि, भाजपा ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी में 75 वर्ष की उम्र को लेकर कोई लिखित नियम नहीं है। 2023 में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 तक हमारा नेतृत्व करते रहेंगे।” मोहन भागवत के बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। क्या राजनीति में उम्र सीमा तय होनी चाहिए? क्या वरिष्ठ नेताओं को मार्गदर्शक की भूमिका स्वीकार कर युवा नेतृत्व को आगे लाना चाहिए? यह सवाल आने वाले समय में और गहराता नजर आएगा।

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गुरुग्राम में टेनिस खिलाड़ी की गोली लगने से मौत, पिता को किया गया गिरफ्तार

गुरुग्राम, 10 जुलाई 2025: हरियाणा के गुरुग्राम से एक दुखद घटना सामने आई है, जहां 25 वर्षीय टेनिस खिलाड़ी राधिका यादव की उनके ही पिता द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना गुरुग्राम के सेक्टर 57 स्थित सुशांत लोक फेज-2 इलाके में उनके घर पर हुई। कौन थीं राधिका यादव? राधिका यादव एक उभरती हुई टेनिस खिलाड़ी थीं। उन्होंने राज्य स्तर पर कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया था और अंतरराष्ट्रीय फेडरेशन (ITF) सर्किट में भी खेल चुकी थीं। कंधे की चोट के बाद उन्होंने सक्रिय खेल से ब्रेक लिया और गुरुग्राम में अपनी खुद की टेनिस कोचिंग अकादमी शुरू की थी। वह स्कॉटिश हाई इंटरनेशनल स्कूल की छात्रा रही थीं और अपने अनुशासन व मेहनत के लिए जानी जाती थीं। घटना का विवरण पुलिस के अनुसार, यह घटना सुबह करीब 10:30 बजे उस समय हुई जब राधिका अपने घर पर थीं। तभी उनके पिता ने उन पर फायरिंग की। पड़ोसियों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायल राधिका को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। घटनास्थल से पुलिस ने एक लाइसेंसी हथियार बरामद किया है और आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आए कारण प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि पिता-पुत्री के बीच पिछले कुछ समय से पारिवारिक तनाव चल रहा था। राधिका की कोचिंग अकादमी और उनकी सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर मतभेद की बात भी सामने आई है। पुलिस इस मामले की सभी एंगल से जांच कर रही है। पुलिस का बयान गुरुग्राम पुलिस ने बताया कि आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। मामले की विस्तृत जांच जारी है, और जल्द ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट व अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। खेल जगत में शोक की लहर राधिका यादव की असमय मृत्यु से खेल जगत में शोक की लहर फैल गई है। कई खिलाड़ियों और कोचों ने सोशल मीडिया पर दुख जताते हुए राधिका को श्रद्धांजलि दी है। समाज के लिए एक संदेश यह घटना न केवल एक व्यक्तिगत नुकसान है, बल्कि समाज के लिए एक गहरी सीख भी है। पारिवारिक संवाद की कमी और मानसिक तनाव जैसे मुद्दे आज के दौर में गंभीर रूप से उभर कर सामने आ रहे हैं।

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अमरनाथ यात्रा 2025: पूरी जानकारी, रजिस्ट्रेशन से लेकर सुरक्षा तक

अमरनाथ यात्रा 2025 आध्यात्मिक आस्था और साहसिक यात्रा का संगम है। यह यात्रा 3 जुलाई से शुरू हो चुकी है और 9 अगस्त 2025 को रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगी। बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालु जम्मू-कश्मीर की कठिन घाटियों की ओर बढ़ रहे हैं। यात्रा की शुरुआत और समापन इस वर्ष यात्रा 38 दिनों तक चलेगी। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु बालटाल और पहलगाम मार्गों से होकर बाबा बर्फानी की गुफा तक पहुंच रहे हैं। हर दिन सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक दर्शन की अनुमति दी जा रही है। यात्रा के दो प्रमुख मार्ग1. पहलगाम मार्ग (लगभग 48 किमी लंबा): यह मार्ग अपेक्षाकृत लंबा जरूर है, लेकिन चढ़ाई कम होने के कारण अधिक सुविधाजनक माना जाता है।2. बालटाल मार्ग (लगभग 14 किमी लंबा): यह मार्ग छोटा है, लेकिन कठिन और खड़ी चढ़ाई वाला है, जिसे अनुभवी यात्री अधिक पसंद करते हैं। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया और नियम• यात्रा में शामिल होने के लिए सभी श्रद्धालुओं को रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है।• ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम से पंजीकरण हो रहा है।• यात्रियों की आयु 13 से 70 वर्ष के बीच होनी चाहिए।• एक वैध स्वास्थ्य प्रमाणपत्र (CHC) अनिवार्य है। जिन लोगों को हृदय या सांस संबंधी बीमारियाँ हैं, उन्हें अनुमति नहीं दी जाती।• हर यात्री को यात्रा आरंभ से पहले RFID टैग और यात्रा परमिट लेना अनिवार्य है। सुरक्षा और सुविधाएं अमरनाथ यात्रा 2025 में सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। घाटी में करीब 80,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं।• पूरे मार्ग पर मेडिकल कैंप, रिलीफ सेंटर और पुलिस सहायता केंद्र बनाए गए हैं।• यात्रा मार्ग को नो-फ्लाई ज़ोन घोषित किया गया है, यानी यहां ड्रोन और अन्य उड़ने वाले उपकरणों पर प्रतिबंध है।• BSNL ने तीर्थयात्रियों के लिए एक विशेष यात्रा सिम कार्ड उपलब्ध कराया है, जिसकी वैधता 15 दिन है और जो पूरे रूट पर काम करता है। श्रद्धालुओं की संख्या और यात्रा का जोश यात्रा के पहले चार ही दिनों में करीब 70,000 से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। तीसरे जत्थे में करीब 6,500 श्रद्धालु रवाना हुए। सुरक्षा और मौसम की स्थितियों को देखते हुए टोकन आधारित दर्शन प्रणाली लागू की गई है ताकि भीड़ नियंत्रण में रहे। हालिया घटनाएं हाल ही में यात्रा मार्ग पर बसों की भिड़ंत में कुछ यात्री घायल हुए हैं, लेकिन किसी बड़ी दुर्घटना की सूचना नहीं है। प्रशासन ने स्थिति को तुरंत नियंत्रण में लिया और यात्रियों को वैकल्पिक साधनों से गंतव्य तक पहुँचाया गया। इस घटना के बावजूद यात्रा का उत्साह बिल्कुल कम नहीं हुआ है। रहने और भोजन की व्यवस्था• पहलगाम और बालटाल मार्गों पर श्रद्धालुओं के लिए अस्थाई टेंट, सरकारी विश्रामगृह और निजी शिविर उपलब्ध कराए गए हैं।• खाने-पीने की सामग्री के लिए लंगर और सरकारी कैंटीन भी पूरे मार्ग पर स्थापित हैं।• यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे हल्का, ऊनी वस्त्र, छाता, दवा, पानी की बोतल और टॉर्च साथ रखें। महत्वपूर्ण सुझाव• यात्रा शुरू करने से पहले मेडिकल चेकअप अवश्य कराएं।• ट्रैकिंग अभ्यास और ऊँचाई के अनुकूलन के लिए योग और प्राणायाम करें।• मौसम की जानकारी लेते रहें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। निष्कर्ष अमरनाथ यात्रा 2025 एक आध्यात्मिक अनुभव है, जो न केवल भक्ति से भरपूर है, बल्कि एक चुनौतीपूर्ण पर्वतीय यात्रा भी है। प्रशासन द्वारा की गई मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, चिकित्सा सुविधाएं और यात्रा मार्गों की देखरेख के कारण यह यात्रा अब पहले से अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक हो चुकी है। अगर आप भी बाबा बर्फानी के दर्शन की इच्छा रखते हैं, तो जल्द ही रजिस्ट्रेशन करवाएं और इस पवित्र यात्रा का हिस्सा बनें।

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BRICS 2025 समिट: भारत क्यों है इस वैश्विक मंच का केंद्र?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्राज़ील यात्रा ने 17वीं BRICS लीडर्स समिट की शुरुआत की। यह बैठक रियो डी जेनेरियो के म्यूज़ियम ऑफ मॉडर्न आर्ट में आयोजित की गई, जहां उनका स्वागत ब्राज़ील के राष्ट्रपति ‘लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा’ ने किया। इस तीन दिवसीय सम्मेलन का आयोजन ऐसे समय पर हो रहा है जब दुनिया आर्थिक और भू-राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रही है। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की फिर से चुनावी मौजूदगी, इज़राइल-हमास संघर्ष और वैश्विक व्यापार में बदलाव जैसे मुद्दे चर्चा में हैं। इस समिट की थीम है — “समावेशी और टिकाऊ शासन के लिए वैश्विक दक्षिण का सहयोग”। भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता संभालेगा, जिससे इसकी भूमिका और भी अहम हो जाती है। क्या है BRICS और क्यों है यह महत्वपूर्ण? BRICS एक अंतर-सरकारी मंच है जिसमें ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। इसका उद्देश्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज़ को मज़बूती देना और पश्चिम-प्रधान वैश्विक संस्थाओं के संतुलन को बदलना है। 2006 में यह एक राजनीतिक मंच के रूप में शुरू हुआ और 2011 में दक्षिण अफ्रीका इसके साथ जुड़ा। 2023 में BRICS का विस्तार हुआ और इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई और इंडोनेशिया जैसे देश भी शामिल हुए। अब यह मंच एक बड़े वैश्विक गठबंधन की ओर बढ़ रहा है। यह कोई औपचारिक संगठन नहीं है — इसके पास कोई चार्टर, स्थायी सचिवालय या बाध्यकारी नियम नहीं हैं। फिर भी, सदस्य देश आर्थिक विकास, जलवायु परिवर्तन, वित्तीय स्वतंत्रता और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करते हैं। BRICS के दो मुख्य आर्थिक स्तंभ हैं:• न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB): $39 बिलियन से अधिक के बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट स्वीकृत कर चुका है।• $100 बिलियन का कंटिंजेंट रिजर्व अरेंजमेंट: मुद्रा संकट के समय सदस्यों को समर्थन देने के लिए। BRICS बनाम G7 और NATO: कौन है ज़्यादा प्रभावशाली? BRICS देश दुनिया की लगभग 40% GDP (PPP के अनुसार) और 50% जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह समूह प्राकृतिक संसाधनों और ऊर्जा भंडार में भी अग्रणी है। हालांकि, G7 देश प्रति व्यक्ति आय, तकनीकी उन्नति और वैश्विक संस्थागत प्रभाव के मामले में आगे हैं। NATO एक सैन्य गठबंधन है, जबकि BRICS आर्थिक सहयोग और विकास पर केंद्रित है। BRICS की तुलना में NATO के पास अधिक सैन्य बजट और रक्षा ढांचा है। भारत की भूमिका: BRICS 2025 समिट में क्या कर रहा है भारत? ब्राज़ील समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के मुख्य मुद्दों को वैश्विक मंच पर उठा रहे हैं, जिनमें शामिल हैं:• आतंकवाद के खिलाफ साझा नीति• क्लाइमेट फाइनेंस के लिए समर्थन• आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में सहयोग• राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देना भारत BRICS का सबसे तेज़ी से बढ़ता हुआ सदस्य है और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ चीन के प्रभाव का संतुलन भी प्रदान करता है। मोदी सरकार के नेतृत्व में भारत न केवल BRICS बैंक में अहम भूमिका निभा रहा है, बल्कि वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को भी मजबूती दे रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा है “भारत BRICS का संस्थापक सदस्य होने के नाते उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सहयोग के इस मंच के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हम एक न्यायपूर्ण, बहुपक्षीय और संतुलित विश्व व्यवस्था के लिए मिलकर काम करेंगे।” निष्कर्ष:BRICS अब केवल एक आर्थिक मंच नहीं रह गया है, बल्कि यह एक वैकल्पिक वैश्विक शक्ति संरचना का संकेत बन चुका है। भारत की इसमें भागीदारी और नेतृत्व इसकी वैश्विक स्थिति को और मजबूत कर रही है। ब्राज़ील समिट 2025 भारत के लिए केवल एक मंच नहीं, बल्कि वैश्विक दक्षिण के भविष्य को आकार देने का अवसर है।

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गुजरात में भारी बारिश का कहर: कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट, बाढ़ जैसे हालात

7 जुलाई 2025 को IMD ने जारी किया चेतावनी, अगले कुछ दिन और मुश्किल गुजरात में मानसून इस बार पूरे जोश में है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 7 जुलाई 2025 को कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। दक्षिण गुजरात, सौराष्ट्र और कच्छ के कई हिस्सों में लगातार तेज बारिश, आंधी-तूफान और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। कहां-कहां जारी हुआ ऑरेंज अलर्ट? IMD के अनुसार, निम्न जिलों में 7 जुलाई को ऑरेंज अलर्ट लागू है:• नवसारी • वलसाड • दमन • दादरा नगर हवेली • डांग • तापी • अमरेली • भावनगर • भरूच • छोटा उदेपुर • सूरत इन क्षेत्रों में अत्यधिक भारी बारिश और बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है। जमीन पर हालात: कई जगह पानी-पानी• वांसदा (नवसारी) में सड़कें पूरी तरह पानी में डूबीं।• छोटा उदेपुर में तेज बारिश के कारण एक ट्रैक्टर बह गया।• द्वारका और महुवा क्षेत्रों में नदियां खतरे के निशान के करीब।• भरूच के बाज़ार इलाकों में घुटनों तक पानी भर गया है। क्या-क्या परेशानी हो रही है?• स्कूल-कॉलेजों को अस्थायी रूप से बंद किया गया है।• कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई है।• ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें बंद, फसलें डूबने की संभावना।• प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं। आगे के दिन कैसे रहेंगे?• IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, 10 जुलाई तक भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा।• 11 जुलाई के बाद कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।• सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात में विशेष रूप से सतर्क रहने की ज़रूरत है। पूरे गुजरात में 30% से अधिक बारिश हो चुकी सिर्फ 20 दिनों में गुजरात ने अपने सीज़न की 30% बारिश हासिल कर ली है। यह पिछले 10 सालों की तुलना में सबसे तेज़ बारिश मानी जा रही है। जून में ही भारत भर में 9% अधिक वर्षा दर्ज की गई थी, और जुलाई भी औसत से बेहतर रहने की संभावना है। सरकार और प्रशासन की तैयारी• CM और कलेक्टर्स ने संवेदनशील इलाकों में लोगों को निकालने का आदेश दिया है।• NDRF और SDRF की टीमें तैनात की गई हैं।• स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों पर सावधानीपूर्ण उपाय किए जा रहे हैं।• बाढ़ संभावित क्षेत्रों में नौकाएं, टॉर्च और भोजन के पैकेट्स की व्यवस्था। आम नागरिकों के लिए सलाह• अनावश्यक यात्रा से बचें, खासकर ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों में।• पानी भरे इलाकों से दूरी बनाएं।• मोबाइल पर मौसम विभाग के अलर्ट चालू रखें।• किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन से संपर्क करें। निष्कर्षगुजरात में इस समय मानसून पूरे शबाब पर है। भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है, लेकिन प्रशासन स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पूरी कोशिश कर रहा है। जनता से अनुरोध है कि मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें और सुरक्षित स्थानों पर रहें।

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गौरी व्रत और जया पार्वती व्रत 2025: कब से शुरू होंगे ये उपवास, क्या है अंतर और महत्व?

योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति और वैवाहिक सुख-शांति के लिए कन्याओं द्वारा किया जाने वाला पावन व्रत जुलाई महीने में गुजरात की परंपराओं में एक खास धार्मिक उल्लास देखने को मिलता है। इस समय दो महत्वपूर्ण उपवास शुरू होते हैं – गौरी व्रत और जया पार्वती व्रत। ये दोनों व्रत मुख्यतः अविवाहित कन्याओं द्वारा किए जाते हैं, और इनका उद्देश्य होता है एक उत्तम वर की प्राप्ति तथा सुखद वैवाहिक जीवन की कामना। कब से शुरू होंगे व्रत? गौरी व्रत 2025• आरंभ: रविवार, 6 जुलाई 2025• समापन: गुरुवार, 10 जुलाई 2025• उपवास अवधि: 5 दिन• तिथि अनुसार: आषाढ़ शुक्ल एकादशी से पर्णिमा तक जया पार्वती व्रत 2025• आरंभ: मंगलवार, 8 जुलाई 2025• समापन: रविवार, 13 जुलाई 2025 (रात जागरण के साथ)• व्रत खुलने की तिथि: 14 जुलाई 2025 की सुबह• तिथि अनुसार: आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी से गौरी व्रत की परंपरा और पूजा विधि• यह व्रत मां गौरी (पार्वती) को समर्पित होता है।• 5 दिन तक कन्याएं जमीन पर सोती हैं और बिना नमक-मसाले का सादा भोजन करती हैं।• पूजा में मिट्टी या धातु की गौरी प्रतिमा की स्थापना की जाती है।• व्रत के दौरान जवारा (बीज रोपण) भी किया जाता है, जिसे प्रतिदिन जल अर्पित किया जाता है।• प्रतिदिन व्रत कथा का पाठ किया जाता है और अंत में विशेष पूजा के साथ समापन होता है।• व्रत समाप्ति के दिन सामूहिक भोजन और पूजन के बाद व्रती कन्याओं को विदाई दी जाती है। जया पार्वती व्रत की विशेषताएं• इसमें भी कन्याएं जवारा (बीज) बोती हैं और रोज़ जल चढ़ाती हैं।• हाथ में नागला (लाल-सफेद धागा) बांधा जाता है, जो सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।• रोजाना मां पार्वती की पूजा और कथा वाचन होता है।• अंतिम दिन रात्रि जागरण की परंपरा निभाई जाती है जिसमें भजन और पूजा होती है।• अगले दिन सुबह पूजा के बाद व्रत खोला जाता है। गौरी व्रत और जया पार्वती व्रत में क्या है अंतर? गौरी व्रत और जया पार्वती व्रत, दोनों ही अविवाहित कन्याओं द्वारा किए जाने वाले अत्यंत पावन उपवास हैं, लेकिन इनके स्वरूप और परंपराओं में कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं। गौरी व्रत इस वर्ष 6 जुलाई 2025 से शुरू होकर 10 जुलाई को समाप्त होगा। यह व्रत मुख्य रूप से अविवाहित कन्याएं रखती हैं और इसका उद्देश्य होता है — उत्तम जीवनसाथी की प्राप्ति। इस व्रत के दौरान व्रती सादा भोजन करती हैं, नमक-मसालों का त्याग करती हैं, और जमीन पर सोकर, संयमित जीवन जीती हैं। पूजा में मां गौरी की प्रतिमा स्थापित कर प्रतिदिन कथा और आरती की जाती है। वहीं दूसरी ओर, जया पार्वती व्रत 8 जुलाई 2025 से आरंभ होकर 13 जुलाई की रात जागरण के साथ संपन्न होगा, और व्रत 14 जुलाई की सुबह खोला जाएगा। यह व्रत मुख्य रूप से अविवाहित कन्याओं द्वारा ही किया जाता है, हालांकि कुछ स्थानों पर विवाहित महिलाएं भी इसे करती हैं। इसका उद्देश्य सिर्फ उत्तम वर की प्राप्ति ही नहीं, बल्कि पति की दीर्घायु और पारिवारिक सुख-शांति की भी कामना होता है। इस व्रत की प्रमुख परंपराओं में बीज रोपण (जवारा उगाना), नागला बांधना, और अंतिम रात को जागरण करना शामिल हैं। इस तरह, दोनों व्रतों का उद्देश्य भले ही समान प्रतीत हो, लेकिन उनकी पूजा पद्धति, समापन प्रक्रिया और सांस्कृतिक विधियाँ उन्हें अलग पहचान देती हैं। धार्मिक मान्यता दोनों व्रतों की कथा के अनुसार, एक ब्राह्मण कन्या ने मां पार्वती की तपस्या कर शिव जैसे वर की प्राप्ति की थी। तभी से यह व्रत कन्याओं में प्रचलित हुआ। जया पार्वती व्रत में विशेष रूप से जागरण कर मां को प्रसन्न किया जाता है। निष्कर्ष गौरी व्रत और जया पार्वती व्रत सिर्फ उपवास नहीं हैं, बल्कि ये श्रद्धा, आत्मसंयम और संस्कृति से जुड़ने का माध्यम हैं। इन व्रतों के ज़रिए नई पीढ़ी भी भारतीय परंपराओं को आत्मसात कर रही है।

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नेशनल डॉक्टर्स डे: सेवा, समर्पण और इंसानियत का प्रतीक

1 जुलाई को हर साल भारत में ‘राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस’ यानी National Doctors’ Day मनाया जाता है। यह दिन उन डॉक्टरों को समर्पित है जो अपनी मेहनत, ज्ञान और संवेदनशीलता से लाखों लोगों की ज़िंदगियां बचाते हैं। यह सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि एक ऐसा दिन है जब हम उन “सफेद कोट वाले फरिश्तों” को शुक्रिया कहते हैं जो दिन-रात दूसरों के लिए काम करते हैं कभी-कभी अपनी जान की परवाह किए बिना। इस दिन का इतिहासनेशनल डॉक्टर्स डे भारत के महान चिकित्सक डॉ. बिधान चंद्र रॉय की याद में मनाया जाता है। वह ना केवल एक प्रसिद्ध डॉक्टर थे, बल्कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री भी रहे। उनका जन्म और निधन दोनों 1 जुलाई को ही हुआ था। इस दिन को मनाने की शुरुआत 1991 में हुई थी। सेवा का दूसरा नाम – डॉक्टरहर किसी की ज़िंदगी में कभी न कभी ऐसा समय आता है जब सब कुछ डॉक्टर पर ही निर्भर होता है। चाहे डिलीवरी हो, एक्सीडेंट हो, सर्जरी हो या गंभीर बीमारी, डॉक्टर ही वो इंसान होता है जो उम्मीद का आखिरी सहारा बनता है। कोरोना महामारी के समय तो डॉक्टरों ने जो अद्भुत सेवा दी, वो इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखी जाएगी। PPE किट पहनकर घंटों तक ड्यूटी देना, परिवार से दूर रहना, और खुद की जान जोखिम में डालकर मरीजों की जान बचाना ये सब कुछ उन्होंने बगैर शिकायत के किया। चुनौतियों से भरी एक ज़िंदगीडॉक्टर बनना सिर्फ एक डिग्री लेना नहीं होता। इसके पीछे होती है सालों की मेहनत, रातों की नींद की कुर्बानी, और अंतहीन पढ़ाई। एक डॉक्टर की जिंदगी दूसरों की जिंदगियां बेहतर बनाने में ही बीत जाती है। कई बार मरीज ठीक नहीं होता, तो वही डॉक्टर सबसे पहले टूटता है लेकिन मुस्कान फिर भी चेहरे पर बनी रहती है। डॉक्टर भी इंसान हैंदुख की बात ये है कि कई बार डॉक्टरों को समाज में वो सम्मान और सुरक्षा नहीं मिलती, जिसके वे हकदार हैं। अस्पतालों में हमले, गाली-गलौच और मारपीट की घटनाएं आज भी हो रही हैं। यह सोचने की ज़रूरत है कि जो इंसान हमारी जान बचाता है, उसके लिए हमारा रवैया कैसा होना चाहिए? एक शुक्रिया बहुत कुछ कह जाता हैइस डॉक्टर्स डे पर, चलिए हम सब मिलकर एक छोटा सा वादा करें डॉक्टरों को सम्मान दें, उनकी मेहनत की कद्र करें, और हर किसी को ये बताएं कि डॉक्टर सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि एक सेवा है। “सफ़ेद कोट पहनना आसान नहीं, ये दिल से बड़ा जज़्बा मांगता है।”

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“हेरा फेरी 3 में फिर दिखेगी ऑरिजिनल तिकड़ी! परेश रावल ने अक्षय संग विवाद पर किया खुलासा”

कॉमेडी का बाप -हेरा फेरी-अब एक बार फिर तैयार है दर्शकों को हंसी के तूफान में उड़ाने के लिए! और इस बार, सबसे बड़ी खुशखबरी ये है कि परेश रावल उर्फ ‘बाबू भैया’ ने खुद कन्फर्म कर दिया है कि वो हेरा फेरी 3 में वापसी कर रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने अक्षय कुमार संग हुए विवाद की अफवाहों पर भी पहली बार चुप्पी तोड़ी है और कहा है — “कुछ हुआ ही नहीं! जो हुआ था, वो अब पूरी तरह सुलझ चुका है।” कब और कहां हुआ ये खुलासा? यह बयान 29 जून 2025 को एक इंटरव्यू के दौरान आया, जब परेश रावल The Himanshu Mehta Show में शामिल हुए। उसी दौरान उन्होंने पहली बार साफ किया कि वह ‘हेरा फेरी 3’ का हिस्सा हैं और बाबू भैया के किरदार में फिर से जान डालने के लिए तैयार हैं। क्या था विवाद? और कैसे सुलझा? कुछ महीने पहले यह खबर सामने आई थी कि परेश रावल फिल्म से अलग हो गए हैं और अक्षय कुमार की कंपनी ने उनके खिलाफ ₹25 करोड़ का कानूनी नोटिस भेजा है। परेश रावल ने तब फिल्म की स्क्रिप्ट और कास्टिंग को लेकर आपत्ति जताई थी। पर अब उन्होंने बताया कि यह सिर्फ गलतफहमी थी। उन्होंने ₹11 लाख का साइनिंग अमाउंट और उस पर 15% ब्याज वापस कर दिया और फिर से टीम का हिस्सा बन गए। उनके शब्दों में: “जब जनता किसी किरदार से जुड़ जाती है, तो आपको उसके साथ न्याय करना होता है। बाबू भैया कोई आम किरदार नहीं है, वो जनता के दिलों में बसता है।” कौन-कौन हैं इस बार साथ? इस बार भी वही क्लासिक तिकड़ी लौट रही है:• अक्षय कुमार – राजू• सुनील शेट्टी – श्याम• परेश रावल – बाबू भैया निर्देशन कर रहे हैं प्रियदर्शन, और फिल्म की स्क्रिप्ट पहले से बेहतर और ज़्यादा मजेदार मानी जा रही है। शूटिंग अप्रैल 2025 में शुरू हुई थी, लेकिन विवाद के कारण थोड़ी धीमी हो गई थी। अब जनवरी 2026 से शूटिंग फुल स्पीड में दोबारा शुरू होगी। सिनेमा कल्चर पर परेश रावल का तंज भी चर्चा में परेश रावल ने आजकल के मल्टीप्लेक्स कल्चर पर भी तंज कसते हुए कहा: “सिनेमा स्पा नहीं है! इतनी लग्ज़री नहीं, बस अच्छा कंटेंट चाहिए। हेरा फेरी जैसी फिल्में ही असली सिनेमा हैं।” क्या है आगे की प्लानिंग?• जनवरी 2026: शूटिंग दोबारा शुरू होगी• मिड 2026 / Early 2027: फिल्म की संभावित रिलीज़• डायरेक्शन: प्रियदर्शन• लेखन: न्यू स्क्रिप्ट पर काम लगभग पूरा• लोकेशन: मुंबई, हैदराबाद, और UAE के कुछ हिस्से निष्कर्ष: बाबू भैया की वापसी से ‘हेरा फेरी 3’ एक बार फिर दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बना चुकी है। यह फिल्म सिर्फ एक सीक्वल नहीं, बल्कि एक इमोशन है, जो भारतीय सिनेमा के इतिहास में हमेशा याद की जाएगी। अब फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं उस दिन का जब सिनेमाघरों में फिर से गूंजेगा “उठ जा रे देवा!”

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‘मेरी तो पहले से मां है, फिर क्यों…’, जब काजोल ने सास को मम्मी बुलाने से कर दिया था इनकार

एक्ट्रेस काजोल ने हाल ही में एक इंटरव्यू में अपनी शादी के शुरुआती अनुभव शेयर किए। उन्होंने बताया कि कम उम्र में शादी के बाद उन्हें नई जिम्मेदारियां समझने में वक्त लगा। साथ ही उन्होंने अपनी सास के सहयोग और परिवार के सपोर्ट को सराहा। काजोल ने नयनदीप रक्षित को दिए गए इंटरव्यू में बताया कि जब उन्होंने अजय देवगन से शादी की तब उनकी उम्र सिर्फ 24 साल थी। उन्हें बिल्कुल नहीं पता था कि क्या करना है या किस तरह की जिम्मेदारियां निभानी हैं। काजोल ने कहा कि इस सपोर्ट के चलते उन्होंने करियर और परिवार दोनों को संतुलित किया। काजोल ने बताया, “मैं सच में नहीं जानती थी कि मैं क्या कर रही हूं। मुझे बिल्कुल नहीं पता था कि मुझे क्या करना है, क्या बनना है। मुझे पता ही नहीं था कि कैसे बात करनी है।” उन्होंने आगे बताया कि सास को ‘मम्मी’ बुलाना उन्हें अजीब लगता था। काजोल ने कहा, “आंटी को मम्मी बुलाना पड़ेगा? क्यों? मेरी एक मां पहले से हैं।” काजोल ने कहा कि उनकी सास ने कभी इस पर जोर नहीं दिया। उन्होंने कभी नहीं कहा कि अब तुम बहू हो तो तुम्हें मम्मी कहना होगा। उन्होंने कहा कि जब होगा तब होगा और फिर ऐसा हुआ भी। बेटी के जन्म के बाद ​​​​​सास ने काजोल को सपोर्ट किया काजोल ने अपनी सास का जिक्र करते हुए बताया कि उनकी बेटी न्यासा के जन्म के बाद उनकी सास ने उन्हें काम पर वापस जाने के लिए प्रेरित किया था। उनकी सास ने कहा था कि अगर काम पर जाना है तो उसके बारे में जरूर सोचना चाहिए। घर संभालने के लिए वे लोग मौजूद हैं, इसलिए अगर काम करना हो तो जरूर करना चाहिए। बता दें कि उनकी नई फिल्म ‘मां’ शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म को विशाल फुरिया ने डायरेक्ट और अजय देवगन, ज्योति देशपांडे और कुमार मंगत पाठक ने प्रोड्यूस किया है।

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