प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्राज़ील यात्रा ने 17वीं BRICS लीडर्स समिट की शुरुआत की। यह बैठक रियो डी जेनेरियो के म्यूज़ियम ऑफ मॉडर्न आर्ट में आयोजित की गई, जहां उनका स्वागत ब्राज़ील के राष्ट्रपति ‘लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा’ ने किया।
इस तीन दिवसीय सम्मेलन का आयोजन ऐसे समय पर हो रहा है जब दुनिया आर्थिक और भू-राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रही है। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की फिर से चुनावी मौजूदगी, इज़राइल-हमास संघर्ष और वैश्विक व्यापार में बदलाव जैसे मुद्दे चर्चा में हैं। इस समिट की थीम है — “समावेशी और टिकाऊ शासन के लिए वैश्विक दक्षिण का सहयोग”। भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता संभालेगा, जिससे इसकी भूमिका और भी अहम हो जाती है।
क्या है BRICS और क्यों है यह महत्वपूर्ण?
BRICS एक अंतर-सरकारी मंच है जिसमें ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। इसका उद्देश्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज़ को मज़बूती देना और पश्चिम-प्रधान वैश्विक संस्थाओं के संतुलन को बदलना है। 2006 में यह एक राजनीतिक मंच के रूप में शुरू हुआ और 2011 में दक्षिण अफ्रीका इसके साथ जुड़ा।
2023 में BRICS का विस्तार हुआ और इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई और इंडोनेशिया जैसे देश भी शामिल हुए। अब यह मंच एक बड़े वैश्विक गठबंधन की ओर बढ़ रहा है।
यह कोई औपचारिक संगठन नहीं है — इसके पास कोई चार्टर, स्थायी सचिवालय या बाध्यकारी नियम नहीं हैं। फिर भी, सदस्य देश आर्थिक विकास, जलवायु परिवर्तन, वित्तीय स्वतंत्रता और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करते हैं।
BRICS के दो मुख्य आर्थिक स्तंभ हैं:
• न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB): $39 बिलियन से अधिक के बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट स्वीकृत कर चुका है।
• $100 बिलियन का कंटिंजेंट रिजर्व अरेंजमेंट: मुद्रा संकट के समय सदस्यों को समर्थन देने के लिए।

BRICS बनाम G7 और NATO: कौन है ज़्यादा प्रभावशाली?
BRICS देश दुनिया की लगभग 40% GDP (PPP के अनुसार) और 50% जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह समूह प्राकृतिक संसाधनों और ऊर्जा भंडार में भी अग्रणी है। हालांकि, G7 देश प्रति व्यक्ति आय, तकनीकी उन्नति और वैश्विक संस्थागत प्रभाव के मामले में आगे हैं।
NATO एक सैन्य गठबंधन है, जबकि BRICS आर्थिक सहयोग और विकास पर केंद्रित है। BRICS की तुलना में NATO के पास अधिक सैन्य बजट और रक्षा ढांचा है।
भारत की भूमिका: BRICS 2025 समिट में क्या कर रहा है भारत?
ब्राज़ील समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के मुख्य मुद्दों को वैश्विक मंच पर उठा रहे हैं, जिनमें शामिल हैं:
• आतंकवाद के खिलाफ साझा नीति
• क्लाइमेट फाइनेंस के लिए समर्थन
• आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में सहयोग
• राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देना
भारत BRICS का सबसे तेज़ी से बढ़ता हुआ सदस्य है और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ चीन के प्रभाव का संतुलन भी प्रदान करता है। मोदी सरकार के नेतृत्व में भारत न केवल BRICS बैंक में अहम भूमिका निभा रहा है, बल्कि वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को भी मजबूती दे रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा है
“भारत BRICS का संस्थापक सदस्य होने के नाते उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सहयोग के इस मंच के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हम एक न्यायपूर्ण, बहुपक्षीय और संतुलित विश्व व्यवस्था के लिए मिलकर काम करेंगे।”
निष्कर्ष:BRICS अब केवल एक आर्थिक मंच नहीं रह गया है, बल्कि यह एक वैकल्पिक वैश्विक शक्ति संरचना का संकेत बन चुका है। भारत की इसमें भागीदारी और नेतृत्व इसकी वैश्विक स्थिति को और मजबूत कर रही है। ब्राज़ील समिट 2025 भारत के लिए केवल एक मंच नहीं, बल्कि वैश्विक दक्षिण के भविष्य को आकार देने का अवसर है।