अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI‑171 उड़ान भरते ही दुर्घटनाग्रस्त हो गई। शुरुआती जांच में सामने आया है कि टेकऑफ़ के महज तीन सेकंड बाद ही विमान के दोनों इंजनों की फ्यूल सप्लाई अचानक कट हो गई, जिससे इंजन बंद हो गए। टेकऑफ़ के सिर्फ 29 सेकंड के भीतर विमान एयरपोर्ट के बाहर क्रैश हो गया।
टेकऑफ़ के तुरंत बाद क्या हुआ?
12 जून को दोपहर करीब 1:38 बजे (भारतीय समयानुसार) बोइंग 787 ड्रीमलाइनर ने अहमदाबाद एयरपोर्ट के रनवे 23 से उड़ान भरी।
जैसे ही विमान हवा में उठा, सिर्फ 3 सेकंड के अंदर दोनों इंजनों की फ्यूल सप्लाई बंद हो गई। इस वजह से दोनों इंजन बंद हो गए और विमान पूरी तरह पावर खो बैठा। इसके बाद विमान ज़मीन की ओर गिरने लगा।
कॉकपिट रिकॉर्डिंग में क्या मिला?
कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर में एक पायलट को यह कहते हुए सुना गया कि “तुमने क्यों कट-ऑफ किया?” जिस पर दूसरा पायलट इंकार करता है।
इसी दौरान दोनों पायलट इंजन को दोबारा स्टार्ट करने की कोशिश करते हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त पावर नहीं मिल पाती।
1:39 बजे (08:09 UTC) पायलट ने “MAYDAY” कॉल दी, लेकिन उसका पूरा संदेश कंट्रोल टॉवर तक नहीं पहुंच पाया।
क्रैश कहां हुआ?
विमान अहमदाबाद एयरपोर्ट से लगभग 1.5 से 2 किलोमीटर दूर मेघाणी नगर क्षेत्र में क्रैश हुआ।
यह इलाका सिविल अस्पताल परिसर और मेडिकल कॉलेज हॉस्टल के पास स्थित है।
विमान अधिकतम लगभग 625 फीट (190 मीटर) की ऊंचाई तक ही पहुंच सका और लैंडिंग गियर नहीं उठाया गया था।
ब्लैक बॉक्स में क्या जानकारी मिली?
ब्लैक बॉक्स के डेटा से पुष्टि हुई कि टेकऑफ़ के तुरंत बाद दोनों इंजनों की फ्यूल सप्लाई स्विच “RUN” से “CUTOFF” पर चली गई।
अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि यह स्विच मैन्युअली गलती से दबा या किसी तकनीकी खराबी के कारण ऐसा हुआ।
टेकऑफ़ से कुछ मिनट पहले स्टेबलाइज़र सेंसर में खराबी दर्ज की गई थी, जिसे इंजीनियरों ने ठीक करने का दावा किया था।
कितने लोग मारे गए?
हादसे में कुल 260 लोगों की मौत हुई, जिनमें 230 से अधिक यात्री शामिल थे।
एक यात्री चमत्कारिक रूप से जीवित बचा है।
इस दुर्घटना में ज़मीन पर भी कुछ लोग घायल हुए, जिनका इलाज चल रहा है।
जांच की स्थिति
इस हादसे की जांच भारत की DGCA, ब्रिटेन की AAIB और अमेरिका की NTSB मिलकर कर रहे हैं।
12 जुलाई को जारी हुई प्रारंभिक रिपोर्ट में यह सामने आया है कि क्रैश का कारण फ्यूल कट-ऑफ था।
फाइनल रिपोर्ट आने में अभी समय लगेगा, जो हादसे के वास्तविक कारणों को उजागर करेगी।